Tuesday, June 10, 2008

अब...

अब ना जिस्म हूं ....ना एहसास हूँ...
मृग तृष्णा हूँ.. प्यास हूँ..
शाम का बूझा दिया... उजाले की तलाश हूँ...
देखो, तो कही नहीं....ढूंढो तो आस पास हूँ..!!

मैं........